पुरुष दिवस
हर स्त्री के हिस्से में
आ सकता है
पुरुष का साथ
स्नेह
प्रेम
वात्सल्य
किन्तु हर स्त्री के हिस्से नहीं आते
पुरुष के आँसू
अगर तुम्हारे काँधे पर गिरें
उन आँसुओं की बूंदें
ओ स्त्री!
धन्य समझना स्वयं को
क्योंकि केवल तू
उन क्षणों की राजदार है
उन मोतियों को
अपने आँचल में सहेजना
तुम्हारी जिम्मेदारी है
~राजविन्दर